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Tuesday, 4 March 2014

विचार-श्रंखला : मार्च-I, 2014

आपत्तियां मनुष्यता की कसौटी हैं, इन पर खरा उतरे बिना कोई भी व्यक्ति सफल नहीं हो सकता है।

विकन्द्रीकरण के इस युग में सपने ही वे कुंजियॉं हैं, जो हर एक को बान्धे रखते हैं।

जब श्रद्धा पैदा होती है, तो वह मार्ग की समस्त बाधाओं को दूर कर देती है। इससे चित्त निर्मल, आनंदित और मुक्त हो जाता है।

जिसको रहस्य गोपनीय रखना नहीं आता, वह सफलता का मुंह नहीं देख सकता।

एक बार मन में शक का कीड़ा रेंग गया, तो उसका इलाज न लुकमान के पास है, न धन्वन्तरि के पास।

दुनिया में तरक्की के बावजूद पत्रकारों का संघर्ष अभी भी खत्म नहीं हुआ है और न ही कभी हो पाएगा।

उपयोग और नयी बात सीखने के लिए सबसे पहले मस्तिष्क को खाली और निर्मल करना जरूरी है।

संकल्प करें कि मुझे सहन करने की शक्ति का विकास करना है। यह संकल्प महान बनने की दिशा उद्घाटित कर सकता है।

जब लड़की इश्क में डूबी होती है, तब वह क्या सोच रही है या बोल रही है, इसका उसे भान नहीं होता और इश्क में डूबे हुए लड़के को न कुछ साफ दिखाई देता है और नहीं ही सुनाई देता है।

वर्तमान को तो गुजर ही जाना है। अत: न तो खुशी से पागल हों और न गम से हताश हों। बल्कि ध्यान रहे, समय को तो बदलना ही है।

दूसरों को जानने वाला विद्वान और स्वयं को जानने वाला ज्ञानी है।

जब भगवान इंसान से घृणा नहीं करते तो फिर हमें क्या अधिकार है कि हम दूसरों से नफरत करें।

यदि किसी से अपना सम्मान करवाना है तो पहले दूसरों का सम्मान करना सीखें।

अपने लिए रास्ता तो सभी बनातें हैं, परन्तु इंसान तो वह महान है जो दूसरों के लिए रास्ता बनाता है।

सही मायने में हमारे दिमाग में हजारों अच्छे विचार आते है, लेकिन उन्हें आजमाने के लिए हमें पहले उन पर गहराई से विचार करना चाहिए।

कामयाबी इस बात से तय होती है कि आप अपने मकसद को पूरा करने के लिए किस हद तक आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।

स्वाभिमान की कीमत पर कोई सम्मान या कोई उपाधि लेना बुद्धिमानी नहीं है, अपना सम्मान खुद करना सीखें।

Monday, 10 February 2014

विचार-श्रंखला : फरवरी-I, 2014

जो व्यक्ति परिवर्तन का जोखिम लेने से इनकार कर देता है, वह आगे बढने में असफल हो जाता है।

नियमित अभ्यास और समर्पण किसी भी चीज के लिए बहुत जरूरी है।

कहा जाता है कि ईश्‍वर भक्त के लिए हर चीज सुलभ रहती है, इसलिए उसे लोभ से दूर ही रहना चाहिए।

शांति हासिल करने के लिए शुरुआती कदम यह है कि अपनी शारीरिक प्रतिक्रियाओं को अनुशासित कर लें।

पद के अहंकार में अपने दायित्व को भूल जाने वाले व्यक्ति को जीवन में कष्ट उठाने पड़ते हैं।

विलासिता निर्बलाता और चाटुकारिता के वातावरण में न तो संस्द्भति का उद्भव होता है और न ही विकास।

यदि मनुष्य परिश्रम न कर और हाथ पर हाथ धरे रखकर केवल मशीनों पर निर्भर रहे तो वह कभी स्वस्थ नहीं रह सकता।

ईमानदारी वह गोंद है, जो हमारे जीने के तरीके को जोड़े रखती है। हमें अपनी ईमानदारी बरकरार रखने के लिए लगातार कोशिश करनी चाहिए।

जो धैर्यवान है और मेहनत से नहीं घबराता, सफलता उसकी दासी है।

Saturday, 6 July 2013

विचार-श्रंखला : जून-II, 2013

विलासिता, निर्बलता और चाटुकारिता के वातावरण में न तो संस्कृति का उदभव होता है और न ही विकास का।-काका कालेलकर

अच्छी युक्ति से जीवन में हमें कठिन से कठिन समस्याओं का बहुत आसान समाधान मिल जाता है।

जैसे जल से अग्नि को शान्त किया जाता है, वैसे ही ज्ञान से मन को शान्त रखना चाहिए।-वेदव्यास।

दुश्मनी को हम दुश्मनी से नहीं मिटा सकते, प्रेम ही उसे मिटा सकता है।-आचार्य विनोबा भावे।

विचार का चिराग बुझ जाने से आचार अन्धा हो जाता है।

उपकार मानना या न मानना व्यक्तिगत है, लेकिन इसका आध्यात्मिक अर्थ भी है। किसी के उपकार को न मानना कृतध्नता कहलाता है।

मनुष्य केवल उन्हीं बातों को याद रखता है, जिन्होंने उस पर गम्भीर प्रभाव डाला है, जो उसके लिए महत्वपूर्ण या मार्मिक होती हैं।

सेवा ही वह सीमेंट है जो लोगों को जीवन पर्यंत स्नेह और साहचर्य में जोड़े रख सकती है।

माला फेरने, तिलक लगाने और मन्दिर जाने से धर्म पालन नहीं होता, धर्म का पालन जीवन द्वारा होता है।

अध्यापक राष्ट्र की संस्कृति के चतुर माली होते हैं, वे संस्कारों की जड़ों में खाद देते है और अपने श्रम से सींचकर महापुरुष बनाते हैं।

कुंठा का मूल है कि आप बहुत कुछ तुरन्त करना, सीखना और हासिल करना चाहते हैं।

मनुष्य मन की निर्बलता, उसे सफलता से दूर ले जाती है। सफलता के लिए परिश्रम और दृढ़निश्‍चय की आवश्यकता होती हैं।

सकारात्मक सोच के अन्तर्गत एक सही नजरिया बनाएं। मन की खिड़किया खुली रखें, जिससे बाहर की स्थिति पर नजर रहे।

जीवन उपन्यास की तरह है, जिसके हर पृष्ठ पर कुछ नया इंतजार कर रहा होता है।

स्त्रोत : प्रेसपालिका, 01-16 जून, 2013

Saturday, 4 May 2013

विचार-श्रंखला : मई-I, 2013

  1. राजा और हाथी से सावधान रहो, हाथी चलते-चलते और राजा हंसते-हंसते ही मारता है।
  2. अपनी प्रशंसा चाहने वाले लोगों से दूर रहो, उन्हें सुझाव भी मत दो।
  3. शक्तिशाली से डरना नहीं चाहिये, बल्कि उससे मुकाबला करने के लिये साहस इकट्ठा करना चाहिये।
  4. कही जा रही बातों को संक्षेप में नोट करें।
  5. निन्दा करने से बचने का एक ही तरीका है कि त्रुटियां ढूंढना छोड़ दो।
  6. ज्यादातार लोग गलत जगह पर गलत काम करते हैं और असफलता हाथ लगने पर भाग्य को कोसते रहते हैं।
  7. मानवता के नाते हम सभी का दायित्व है कि हम जहॉं कहीं भी पीड़ित व दीन-दुखियों को देखें तो उनकी यथोचित सहायता करें।
  8. जो व्यक्ति वाणी से ईमानदार नहीं, वह किसी भी काम में ईमानदार नहीं हो सकता।
  9. अगर समय रहते कदम उठाये जाएं तो किसी भी सम्भावित बड़ी दुर्घटना से बचा जा सकता है।
  10. आप जितना अपनी चेतना से अपरिचित रहेंगे, उतनी ही आप में जीवटता की कमी होगी।
  11. जीवन में आगे बढने के लिये जरूरी है कि छोटी-छोटी बातों की ओर ध्यान दिये बगैर बड़ा सोचें और इन बातों का बुरा न मानें।
  12. कभी-कभी व्यक्ति अपने अहंकार एवं विद्वता के मद में चूर होकर यह भूल जाता है कि ज्ञान अनन्त है और उसकी पूर्णता की कोई सीमा नहीं है।
  13. अच्छे संकल्प करो, ताकि अच्छे मार्ग पर चलना सम्भव हो सके।
  14. कुछ लोग किसी की थोड़ी सी मदद करके बार-बार उसका अहसास दिलाते रहते हैं। इससे उनके अहंकार को तो सन्तुष्टि मिल जाती है, लेकिन ऐसे में की गयी मदद की महत्ता घट जाती है। ऐसे लोगों से मदद प्राप्त करना आत्महत्या करने के समान है।
  15. यदि अतीत को ही याद करते रहेंगे तो वर्तमान में जीना कठिन लगेगा और भविष्य अत्यन्त ही मुश्किल प्रतीत होगा।
  16. स्त्रोत : प्रेसपालिका, 01-16 मई, 2013

Tuesday, 23 April 2013

विचार-श्रंखला : अप्रेल-I, 2013

जिसके पास उम्मीद है, वह लाख बार हारकर भी नहीं हारता।

अगर आम मोहक व्यक्तित्व वाले और लोगों के आकर्षण का केन्द्र होना चाहते हैं तो आपको अच्छा वक्ता होना चाहिए। अपनी सम्प्रेषण कला से कोई व्यक्ति सीधी बात को भी बहुत रोचक बना सकता है। बोलने की यह कला आपमें जन्मजात हो, जरूरी नहीं। इसे कोशिश से पाया जा सकता है।

दूसरों को सुनना भी जरूरी है, जिसके लिये जरूरी है कि-दूसरों की बातों को ध्यान से सुनना। वाक्य खत्म होने से पहले नहीं बोल पड़ना। सवालों के जवाब में उल्टे सवाल नहीं करना। पूर्वाग्रह हर किसी में होते हैं, लेकिनउन्हें समझना और उन पर नियन्त्रण रखना जरूरी है। जब दूसरे बोल रहे हों तो उन्हें सुने न कि अपने ही विचारों में खोये रहें। जब एक व्यक्ति बोल चुके तब ही अपने जवाब के बारे में सोचना चाहिये, बीच में नहीं। मुद्दे की बात करें, न कि अपनी अभिरुचि की बात करें।

संस्थानों को अपने पुराने कर्मचारियों या सदस्यों के सम्पर्क में रहना चाहिए और जरूरत पड़ने पर उनके अनुभव का लाभ भी उठाना चाहिए।

स्त्रोत : प्रेसपालिका, 16-30 अप्रेल, 2013

Thursday, 3 January 2013

विचार-श्रंखला : जनवरी, 13-01

विचार-श्रंखला : जनवरी, 13-01

आप जो कुछ भी कहते हैं, वह आपके खिलाफ इस्तेमाल किया जाएगा, किसी बहस के दौरान। चाहे वह बहस 10 महीने बाद ही क्यों न हो रही हो। ऐसा इसलिए क्योंकि मैं एक महिला हूं। और, हम कभी कुछ नहीं भूलते। कभी भी नहीं।-पत्नी, पति से!

आपको कभी पता नहीं चलता कि आपके पास क्या है, जब तक कि वह आपसे दूर न हो जाए।

जब आप किसी को हकीकत में प्यार करेंगे तब उम्र, दूरी, कद, वजन सिर्फ एक बुरा अंक बनकर रह जाएगा...!

जब भरोसा टूटता है तो माफी के कोई मायने नहीं होते।

हमारी जिन्दगी में तीन तरह के दोस्त होते हैं: 1) जो किसी खास वजह से दोस्त होते हैं, 2) जो किसी खास वक्त (दौर) के लिए दोस्त होते है और, 3) दोस्त जो जीवन भर के लिए होते हैं।

कोई अगर आपसे नफरत करता है तो उसकी तीन में से कोई एक वजह होती है। 1) वह आपके जैसा बनना चाहता है। 2) वह खुद से नफरत करता है। 3) वह आपसे खतरा महसूस करता है।

आप (पति) मेरे (पत्नी) साथ जो सबसे बुरा कर सकते हैं, उनमें एक है मेरी (पत्नी) किसी और (स्त्री) से तुलना करना।-स्त्री।

EX- का मतलब- EXperience के लिए शुक्रिया... हमारा वक़्त EXpire हो चुका है... अब मेरी ज़िन्दगी से EXit करो।

हमें कभी-कभी सलाह की जरूरत नहीं होती। हमें बस कोई चाहिए होता है जो हमें सुने।

दुनिया में सबसे अच्छी फीलिंग वह होती है जब कोई भयानक सपना देखते हुए आपकी नींद टूटती है और आपको एहसास होता है कि वैसा कुछ दरअसल हुआ नहीं था।

आपको जो कुछ चाहिए उसके लिए अगर आप लड़ते नहीं हैं तो जो कुछ आप गंवाते हैं उसके लिए रोइए भी मत।

Saturday, 22 December 2012

विचार-श्रंखला : 3

आप दर्पण में अपना चेहरा देख सकते हैं, लेकिन अपने कर्म में आप अपनी आत्मा को देख सकते हैं।-जॉर्ज बर्नार्ड शॉ

चाहे सूखी रोटी ही क्यों न हो, अपने श्रम से अर्जित भोजन से मधुर और श्रेष्ठ कुछ नहीं होता।-तिरुवल्लुवर

पुरुष भय और हिंसक तरीकों के जरिये महिलाओं पर अपना वर्चस्व कायम रखना चाहते हैं।-हर्ष मंदर, डायरेक्टर सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज

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