यदि आपका कोई अपना या परिचित पीलिया रोग से पीड़ित है तो इसे हलके से नहीं लें, क्योंकि पीलिया इतन घातक है कि रोगी की मौत भी हो सकती है! इसमें आयुर्वेद और होम्योपैथी का उपचार अधिक कारगर है! हम पीलिया की दवाई मुफ्त में देते हैं! सम्पर्क करें : डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 0141-2222225, 98285-02666
Showing posts with label ज्ञान. Show all posts
Showing posts with label ज्ञान. Show all posts

Tuesday, 4 March 2014

विचार-श्रंखला : मार्च-I, 2014

आपत्तियां मनुष्यता की कसौटी हैं, इन पर खरा उतरे बिना कोई भी व्यक्ति सफल नहीं हो सकता है।

विकन्द्रीकरण के इस युग में सपने ही वे कुंजियॉं हैं, जो हर एक को बान्धे रखते हैं।

जब श्रद्धा पैदा होती है, तो वह मार्ग की समस्त बाधाओं को दूर कर देती है। इससे चित्त निर्मल, आनंदित और मुक्त हो जाता है।

जिसको रहस्य गोपनीय रखना नहीं आता, वह सफलता का मुंह नहीं देख सकता।

एक बार मन में शक का कीड़ा रेंग गया, तो उसका इलाज न लुकमान के पास है, न धन्वन्तरि के पास।

दुनिया में तरक्की के बावजूद पत्रकारों का संघर्ष अभी भी खत्म नहीं हुआ है और न ही कभी हो पाएगा।

उपयोग और नयी बात सीखने के लिए सबसे पहले मस्तिष्क को खाली और निर्मल करना जरूरी है।

संकल्प करें कि मुझे सहन करने की शक्ति का विकास करना है। यह संकल्प महान बनने की दिशा उद्घाटित कर सकता है।

जब लड़की इश्क में डूबी होती है, तब वह क्या सोच रही है या बोल रही है, इसका उसे भान नहीं होता और इश्क में डूबे हुए लड़के को न कुछ साफ दिखाई देता है और नहीं ही सुनाई देता है।

वर्तमान को तो गुजर ही जाना है। अत: न तो खुशी से पागल हों और न गम से हताश हों। बल्कि ध्यान रहे, समय को तो बदलना ही है।

दूसरों को जानने वाला विद्वान और स्वयं को जानने वाला ज्ञानी है।

जब भगवान इंसान से घृणा नहीं करते तो फिर हमें क्या अधिकार है कि हम दूसरों से नफरत करें।

यदि किसी से अपना सम्मान करवाना है तो पहले दूसरों का सम्मान करना सीखें।

अपने लिए रास्ता तो सभी बनातें हैं, परन्तु इंसान तो वह महान है जो दूसरों के लिए रास्ता बनाता है।

सही मायने में हमारे दिमाग में हजारों अच्छे विचार आते है, लेकिन उन्हें आजमाने के लिए हमें पहले उन पर गहराई से विचार करना चाहिए।

कामयाबी इस बात से तय होती है कि आप अपने मकसद को पूरा करने के लिए किस हद तक आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं।

स्वाभिमान की कीमत पर कोई सम्मान या कोई उपाधि लेना बुद्धिमानी नहीं है, अपना सम्मान खुद करना सीखें।

Monday, 10 February 2014

विचार-श्रंखला : फरवरी-I, 2014

जो व्यक्ति परिवर्तन का जोखिम लेने से इनकार कर देता है, वह आगे बढने में असफल हो जाता है।

नियमित अभ्यास और समर्पण किसी भी चीज के लिए बहुत जरूरी है।

कहा जाता है कि ईश्‍वर भक्त के लिए हर चीज सुलभ रहती है, इसलिए उसे लोभ से दूर ही रहना चाहिए।

शांति हासिल करने के लिए शुरुआती कदम यह है कि अपनी शारीरिक प्रतिक्रियाओं को अनुशासित कर लें।

पद के अहंकार में अपने दायित्व को भूल जाने वाले व्यक्ति को जीवन में कष्ट उठाने पड़ते हैं।

विलासिता निर्बलाता और चाटुकारिता के वातावरण में न तो संस्द्भति का उद्भव होता है और न ही विकास।

यदि मनुष्य परिश्रम न कर और हाथ पर हाथ धरे रखकर केवल मशीनों पर निर्भर रहे तो वह कभी स्वस्थ नहीं रह सकता।

ईमानदारी वह गोंद है, जो हमारे जीने के तरीके को जोड़े रखती है। हमें अपनी ईमानदारी बरकरार रखने के लिए लगातार कोशिश करनी चाहिए।

जो धैर्यवान है और मेहनत से नहीं घबराता, सफलता उसकी दासी है।

Saturday, 4 May 2013

विचार-श्रंखला : मई-I, 2013

  1. राजा और हाथी से सावधान रहो, हाथी चलते-चलते और राजा हंसते-हंसते ही मारता है।
  2. अपनी प्रशंसा चाहने वाले लोगों से दूर रहो, उन्हें सुझाव भी मत दो।
  3. शक्तिशाली से डरना नहीं चाहिये, बल्कि उससे मुकाबला करने के लिये साहस इकट्ठा करना चाहिये।
  4. कही जा रही बातों को संक्षेप में नोट करें।
  5. निन्दा करने से बचने का एक ही तरीका है कि त्रुटियां ढूंढना छोड़ दो।
  6. ज्यादातार लोग गलत जगह पर गलत काम करते हैं और असफलता हाथ लगने पर भाग्य को कोसते रहते हैं।
  7. मानवता के नाते हम सभी का दायित्व है कि हम जहॉं कहीं भी पीड़ित व दीन-दुखियों को देखें तो उनकी यथोचित सहायता करें।
  8. जो व्यक्ति वाणी से ईमानदार नहीं, वह किसी भी काम में ईमानदार नहीं हो सकता।
  9. अगर समय रहते कदम उठाये जाएं तो किसी भी सम्भावित बड़ी दुर्घटना से बचा जा सकता है।
  10. आप जितना अपनी चेतना से अपरिचित रहेंगे, उतनी ही आप में जीवटता की कमी होगी।
  11. जीवन में आगे बढने के लिये जरूरी है कि छोटी-छोटी बातों की ओर ध्यान दिये बगैर बड़ा सोचें और इन बातों का बुरा न मानें।
  12. कभी-कभी व्यक्ति अपने अहंकार एवं विद्वता के मद में चूर होकर यह भूल जाता है कि ज्ञान अनन्त है और उसकी पूर्णता की कोई सीमा नहीं है।
  13. अच्छे संकल्प करो, ताकि अच्छे मार्ग पर चलना सम्भव हो सके।
  14. कुछ लोग किसी की थोड़ी सी मदद करके बार-बार उसका अहसास दिलाते रहते हैं। इससे उनके अहंकार को तो सन्तुष्टि मिल जाती है, लेकिन ऐसे में की गयी मदद की महत्ता घट जाती है। ऐसे लोगों से मदद प्राप्त करना आत्महत्या करने के समान है।
  15. यदि अतीत को ही याद करते रहेंगे तो वर्तमान में जीना कठिन लगेगा और भविष्य अत्यन्त ही मुश्किल प्रतीत होगा।
  16. स्त्रोत : प्रेसपालिका, 01-16 मई, 2013

s

s
s

Followers